शनिवार, 14 नवंबर 2015

रोज़ एक शायर आज अंकित कुमार

                            ittehad~e~Adab  इत्तेहाद~ऐ~अदब महफ़िल
रोज़ एक शायर आज #अंकित_कुमार
हर रिश्ते से नाता टूटा हर रिश्ते मे अकुलाहट लगी !!
जब उसके दरवाजे पे किसी और की बारात लगी !!

लगने लगे वादे सब झूठे, झूठी उनकी हर बात लगी !!
जब उनके हाथो मे मेहदी ना अंकित नाम लगी !!

लगी टूटने ख्वाब हमारी फूटी हमारी घर बार लगी !!
जब उनके माँगो मे सिन्दुर ना अंकित नाम लगी !!

झूठे लगे हमे इश्क मोहब्बत झूठी प्यार की बात लगी !!
जब उनके दरवाजे पे किसी और की बारात लगी !!

झूठी लगी वो हमको झूठी उनकी हर बात लगी !!
जब हमारे आँसू उनको खुशियों की सौगात लगी !!

झूठी लगी वो पल सुहाने झूठी हमको हर शाम लगी !!
जब उनके हाथो पे किसी और की हाथ लगी !!
-::-अंकित::-

गुरुवार, 28 मई 2015

इत्तेहाद ऐ अदब : ॥ मजदूर ॥ ------------- बना देते है अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान फिर भी ना मिल पाता इनको रोटी कपड़ा और मकान काम करते है सभी मिल के बाप बेटों का होता जुटान बड़ी मुश्किल से मिल पाता इनको सूखी रोटी कच्चे मकान पसीना बहाते हैं दिनभर ये होता पसीने का अपमान इनके बच्चे को ना मिल पाता अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान कब सुधरेगी हालत इनकी कब होगा इसका समाधान कब मिलेगी इनको भी रोटी कब ना होगें ये परेशान कब मिलेगी खुशी इनको कब खुश होगा ये इंसान कब इनके बच्चे पाएँगे अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान बना देते हैं अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान -::::::::::अंकित::::::::::::::-

इत्तेहाद ऐ अदब : ॥ मजदूर ॥ ------------- बना देते है अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान फिर भी ना मिल पाता इनको रोटी कपड़ा और मकान काम करते है सभी मिल के बाप बेटों का होता जुटान बड़ी मुश्किल से मिल पाता इनको सूखी रोटी कच्चे मकान पसीना बहाते हैं दिनभर ये होता पसीने का अपमान इनके बच्चे को ना मिल पाता अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान कब सुधरेगी हालत इनकी कब होगा इसका समाधान कब मिलेगी इनको भी रोटी कब ना होगें ये परेशान कब मिलेगी खुशी इनको कब खुश होगा ये इंसान कब इनके बच्चे पाएँगे अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान बना देते हैं अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान -::::::::::अंकित::::::::::::::-

॥ मजदूर ॥ ------------- बना देते है अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान फिर भी ना मिल पाता इनको रोटी कपड़ा और मकान काम करते है सभी मिल के बाप बेटों का होता जुटान बड़ी मुश्किल से मिल पाता इनको सूखी रोटी कच्चे मकान पसीना बहाते हैं दिनभर ये होता पसीने का अपमान इनके बच्चे को ना मिल पाता अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान कब सुधरेगी हालत इनकी कब होगा इसका समाधान कब मिलेगी इनको भी रोटी कब ना होगें ये परेशान कब मिलेगी खुशी इनको कब खुश होगा ये इंसान कब इनके बच्चे पाएँगे अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान बना देते हैं अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान -::::::::::अंकित::::::::::::::-

॥   मजदूर   ॥             -------------  बना  देते  है  अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान  फिर भी ना मिल पाता इनको   रोटी कपड़ा और मकान  काम करते है सभी मिल के बाप बेटों का होता जुटान  बड़ी मुश्किल से मिल पाता इनको सूखी रोटी कच्चे मकान  पसीना बहाते हैं दिनभर ये होता पसीने का अपमान  इनके बच्चे को ना मिल पाता अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान  कब सुधरेगी हालत इनकी कब होगा इसका समाधान  कब मिलेगी इनको भी रोटी कब ना होगें ये परेशान  कब मिलेगी खुशी इनको कब खुश होगा ये इंसान  कब इनके बच्चे पाएँगे अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान     बना देते हैं अक्सर बड़ी बिल्डिग बड़े मकान    -::::::::::अंकित::::::::::::::-

मंगलवार, 26 मई 2015

रोज़ रक शेयर आज अंकित कुमार

रोज़ रक शेयर आज अंकित कुमार
इत्तेहाद ऐ अदब : 24/5/2015 
को योगदा सत्संग महाविद्यालय राॅची के परिसर मे 3 घंटे बिताया तो प्रकृति की कुछ सुन्दरता नजर आई जिसे कविता के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूॅ।
 बैठा था हरे मैदान मे अंजाने वृक्ष के छाॅव मे 
इक अजीब सा सन्नाटा था 
बीच बीच मे कू- कू की 
आवाज का आना था 
जानवर चिड़ियो का ठिकाना था 
बड़ी दूर मे मकानों का नजराना था
 यूॅ शान्त से खड़े थे वृक्ष सभी 
जैसे इक दूजे से अंजाना था
 कभी हल्की हवा चलती तो झूम जाते थे वृक्ष के पत्ते
 शायद अपनी उपस्थिति का आभास कराना था 
इक अजीब सी शान्ति मिल रही थी वृक्ष की छाॅव मे
कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का तराना था 
हरे -हरे घास पे पीले फूलो का मिल जाना था 
कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का नजारा था -
:::::::अंकित::::: mob 8541058067::-

24/5/2015 को योगदा सत्संग महाविद्यालय राॅची के परिसर मे 3 घंटे बिताया तो प्रकृति की कुछ सुन्दरता नजर आई जिसे कविता के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूॅ। बैठा था हरे मैदान मे अंजाने वृक्ष के छाॅव मे इक अजीब सा सन्नाटा था बीच बीच मे कू- कू की आवाज का आना था जानवर चिड़ियो का ठिकाना था बड़ी दूर मे मकानों का नजराना था यूॅ शान्त से खड़े थे वृक्ष सभी जैसे इक दूजे से अंजाना था कभी हल्की हवा चलती तो झूम जाते थे वृक्ष के पत्ते शायद अपनी उपस्थिति का आभास कराना था इक अजीब सी शान्ति मिल रही थी वृक्ष की छाॅव मे कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का तराना था हरे -हरे घास पे पीले फूलो का मिल जाना था कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का नजारा था -:::::::अंकित::::: mob 8541058067::-

24/5/2015 को योगदा सत्संग महाविद्यालय राॅची के परिसर मे 3 घंटे बिताया तो प्रकृति की कुछ सुन्दरता नजर आई जिसे कविता के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूॅ।     बैठा था हरे मैदान मे   अंजाने वृक्ष के छाॅव मे  इक अजीब सा सन्नाटा था बीच बीच मे कू- कू की आवाज का आना था  जानवर चिड़ियो का ठिकाना था  बड़ी दूर मे मकानों का नजराना था  यूॅ शान्त से खड़े थे वृक्ष सभी जैसे इक दूजे से अंजाना था  कभी हल्की हवा चलती तो झूम जाते थे वृक्ष के पत्ते  शायद अपनी उपस्थिति का    आभास कराना था  इक अजीब सी शान्ति मिल रही थी वृक्ष की छाॅव मे  कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का तराना था  हरे -हरे घास पे पीले फूलो का मिल जाना था  कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का नजारा था    -:::::::अंकित::::: mob 8541058067::-

24/5/2015 को योगदा सत्संग महाविद्यालय राॅची के परिसर मे 3 घंटे बिताया तो प्रकृति की कुछ सुन्दरता नजर आई जिसे कविता के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूॅ। बैठा था हरे मैदान मे अंजाने वृक्ष के छाॅव मे इक अजीब सा सन्नाटा था बीच बीच मे कू- कू की आवाज का आना था जानवर चिड़ियो का ठिकाना था बड़ी दूर मे मकानों का नजराना था यूॅ शान्त से खड़े थे वृक्ष सभी जैसे इक दूजे से अंजाना था कभी हल्की हवा चलती तो झूम जाते थे वृक्ष के पत्ते शायद अपनी उपस्थिति का आभास कराना था इक अजीब सी शान्ति मिल रही थी वृक्ष की छाॅव मे कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का तराना था हरे -हरे घास पे पीले फूलो का मिल जाना था कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का नजारा था -:::::::अंकित::::: mob 8541058067::-

24/5/2015 को योगदा सत्संग महाविद्यालय राॅची के परिसर मे 3 घंटे बिताया तो प्रकृति की कुछ सुन्दरता नजर आई जिसे कविता के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूॅ।     बैठा था हरे मैदान मे   अंजाने वृक्ष के छाॅव मे  इक अजीब सा सन्नाटा था बीच बीच मे कू- कू की आवाज का आना था  जानवर चिड़ियो का ठिकाना था  बड़ी दूर मे मकानों का नजराना था  यूॅ शान्त से खड़े थे वृक्ष सभी जैसे इक दूजे से अंजाना था  कभी हल्की हवा चलती तो झूम जाते थे वृक्ष के पत्ते  शायद अपनी उपस्थिति का    आभास कराना था  इक अजीब सी शान्ति मिल रही थी वृक्ष की छाॅव मे  कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का तराना था  हरे -हरे घास पे पीले फूलो का मिल जाना था  कितना सुन्दर मनोरम प्रकृति का नजारा था    -:::::::अंकित::::: mob 8541058067::-

मंगलवार, 19 मई 2015

बेटियां गगर की रौनक

बेटियां गगर की रौनक
ना राह चलते रिशतो कोनिलाम करती है बेटिया  ना
 वालिद के इजजत को सरेआम करती है बेटिया
मुशकिल घडियो मे हर पल साथ निभाती है बेटिया
 पकत माॅ बाप की जान होतीहै बेटिया
बुढापे मे अकसर झुॅझलाते है बेट मगर
उनहे पयार से सजाती है बेटिया
दुःखी होने पर भी हर पल
वालिद को देख मुसकुराती है बेटिया
 इक नही दो-दो वालिदो कोसंभालती है बेटिया
 सास-ससुर पे भी जानलुटाती है बेटिया
 शायद इसलिए हर रिशते मे उचच पायदान पाती है
 बेटियाॅ :::::::अंकित::::::::::

Betiyan

Betiyan
ना राह चलते रिशतो कोनिलाम करती है बेटिया ना वालिद के इजजत को सरेआम करती है बेटिया मुशकिल घडियो मे हर पल साथ निभाती है बेटिया पकत माॅ बाप की जान होतीहै बेटिया बुढापे मे अकसर झुॅझलाते है बेट मगर उनहे पयार से सजाती है बेटिया ॅ दुःखी होने पर भी हर पल वालिद को देख मुसकुराती है बेटिया ॅ इक नही दो-दो वालिदो कोसंभालती है बेटिया ॅ सास-ससुर पे भी जानलुटाती है बेटिया शायद इसलिए हर रिशते मे उचच पायदान पाती है बेटियाॅ :::::::अंकित::::::::::

ना राह चलते रिशतो कोनिलाम करती है बेटिया ना वालिद के इजजत को सरेआम करती है बेटिया मुशकिल घडियो मे हर पल साथ निभाती है बेटिया पकत माॅ बाप की जान होतीहै बेटिया बुढापे मे अकसर झुॅझलाते है बेट मगर उनहे पयार से सजाती है बेटिया ॅ दुःखी होने पर भी हर पल वालिद को देख मुसकुराती है बेटिया ॅ इक नही दो-दो वालिदो कोसंभालती है बेटिया ॅ सास-ससुर पे भी जानलुटाती है बेटिया शायद इसलिए हर रिशते मे उचच पायदान पाती है बेटियाॅ :::::::अंकित:::::::::mobile no 0854158067:

ना राह चलते रिशतो कोनिलाम करती है बेटिया  ना वालिद के इजजत को सरेआम करती है बेटिया  मुशकिल घडियो मे हर पल साथ निभाती है बेटिया  पकत माॅ बाप की जान होतीहै बेटिया  बुढापे मे अकसर झुॅझलाते है बेट मगर उनहे पयार से सजाती है बेटिया ॅ दुःखी होने पर भी हर पल वालिद को देख मुसकुराती है बेटिया ॅ इक नही दो-दो वालिदो कोसंभालती है बेटिया ॅ सास-ससुर पे भी जानलुटाती है बेटिया  शायद इसलिए हर रिशते मे उचच पायदान पाती है बेटियाॅ :::::::अंकित:::::::::mobile no 0854158067: