गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

फिदेल कास्त्रो

फिदेल कास्त्रो

साम्यवाद, समाजवाद और अधिनायकवाद के इस लाल सितारे का अस्त एक ऐसे समय में हुआ है जब व्यक्तिवाद को सत्ता पर कब्ज़े के लिए बंदूक की बजाय मतपेटियों का सहारा मिल रहा है। व्यक्ति और विचार के बीच का अंतर निरंतर महीन हो रहा है। अमेरिका में एक नई तरह की लाल चादर चढ़ी है और इधर इसे लाल सितारे का अस्त हो जाना, प्रतीक रूप में ही सही, महत्वपूर्ण तो है ही। फिदेल कास्त्रो क्रांति से आगे क्या? के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे। क्या अच्छा हो सकता है, नायकवादी निरंकुश सत्ता अच्छा करना चाहे तो कैसे और बुरा तो कैसे, दोनों ही उनकी नीतियों, भाषणों और सिद्दांतों के जरिए परिभाषित होते रहेंगे। क्रांति के बारूद से अपने नायकत्व की सिगार जलाने वाले फिदेल कास्त्रो को लाल सलाम!!

शनिवार, 26 नवंबर 2016

किराया

मैं अपने आंसुओ में दर्द की कश्ती चलाकर के
तुम्हारे दिल मे रहने का किराया भेज देता हूं

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

मत करना

मत करना

किसी के इश्क़ मे दिल बेकरार मत करना ।
अगर हो चैन से जीना तो प्यार मत करना ।
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हमें यकीन है इक दिन वो लौट आएगा,
कहा था जिसने मेरा इंतज़ार मत करना ।
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मुहब्बतों मे कोई कब किसी की सुनता है,
किसी भी शख्स को तू होशियार मत करना ।
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बड़े सुकून  से हम  दोनो  भाई  रहते  है,
हमारे  बीच  मे  कोई  दरार  मत करना ।
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नज़र नज़र से मिले तो नज़र ही लग जाए,
किसी नज़र का तू ऐतबार मत करना ।
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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

मत करना

हमें यकीन है इक दिन वो लौट आएगा
जो कह गया था मेरा इंतज़ार मत करना
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बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

देखते है

नजर को मिलाकर नजर देखते है |
मुहब्बत का अपनी असर देखते है |
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थी जिनकी निगाहों मे बेखौफ चाहत,
उन्हीं की निगाहों मे डर देखते है |
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हमे दिल से अपने भुला देने वाले,
तेरे ख्वाब हम रातभर देखते है |
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कई दर्द हमने किताबों में लिक्खे,
मगर लोग खाली कवर देखते है |
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मुनासिब नही बिन तेरे जिंदगी अब,
वो कब यूं कहें उम्र भर देखते है |
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है  काँटों  भरी  ज़िन्दगी  ये  हमारी,
मगर हम खियाबाँ में घर देखते हैं |
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सहम जाती है धड़कने मेरी उस पल,
उसे हम जहा भी जिधर देखते है |
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मेरे नैन अब भी "कविता" का रस्ता,
सुबह शाम और दोपहर देखते है |
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मेरी मौत पर कौन कितना है रोया,
उन्हें जब लगेगी खबर देखते है |
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"रईस" कोई उम्मीद उनसे न रक्खो,
मुहब्बत में जो रहगुजर देखते है |
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ख़ियाबां= पुष्पवाटिका, फूलों की क्यारी
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

लिखूँगा

तेरे हुक्म पर इल्तिजा पर लिखूँगा
मैं अब शेर तेरी अदा पर लिखूंगा

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हुकूमत मिली गर मुझे इस जहाँ की
तिरा नाम मैं चन्द्रमा पर लिखूँगा

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बहुत लिख लिया बेवफ़ाई पर मैंने
ग़ज़ल कोई तेरी वफ़ा पर लिखूँगा

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निगाहें झुका कर तेरा मुस्कुराना
सनम तेरी शर्म ओ हया पर लिखूँगा

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तेरा इश्क़ ही अब ख़ुदा है हमारा
मैं जब भी लिखूँगा ख़ुदा पर लिखूंगा

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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

नजरअंदाज

हमारे बीच में जो फासले है कम नही होंगे |
तुम्हारी याद मे अब नैन मेरे नम नही होंगे |
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नजरअंदाज कर लो आज लेकिन याद रखना तुम
हमारी याद आएगी तुम्हे जब हम नही होंगे |
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मेरे दिल मे बना नासूर वो तेरा कहा हर लफ्ज़ ,
रहूंगी खुश वहाॅ पर मैं जहाॅ पर तुम नही होंगे |
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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

बोलतीं है...

कभी हद से बढ़कर कहां बोलतीं है ।
मेरी  गज़ले  मेरी  जुबां  बोलतीं  है ।
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तुम्हीं  से शुरू मेरे  दिल की है दुनिया
तुम्हें   ही  जमीं  आसमां  बोलतीं  है ।
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कई नामचीन  चहरे  मरते है उस पे,
मगर वो  हमें अपनी  जां बोलतीं है ।
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जला  करते  है  फूल  उनसे है सारे,
मेरा  नाम  जब  भी जहां बोलतीं है ।
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हमें सिर्फ  वो  ही  नही जान  अपनी,
फलां और फलां और फलां बोलतीं है
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Rais Pithampuri. .....