ख्वाब में मुझको सताना छोड़ दे |
बेवफा अब हक़ जताना छोड़ दे |
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____ गर् छुपाना है मुहब्बत के निशां,
____ आँख में काजल लगाना छोड़ दे |
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खाक कर देंगे तुझे ए गुलबदन,
अश्क से मेरे नहाना छोड़ दे |
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____ बाँधकर सहरा चला हूँ मौत को,
____ कत्ल से मुझको डराना छोड़ दें |
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जानता हूँ हुस्न की जादूगरी,
जादु मुझपे आज माना छोड़ दे |
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____ हर अदा से हूँ तेरी वाकिफ सनम,
____ तीर नजरों के चलाना छोड़ दे |
☪
उठ रही है बेवफाई की लहर,
रेत से कह दो घराना छोड़ दे |
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____ बद्दुआ से "डर,, गरीबों की 'रइस,
____ हर किसी के घर जलाना छोड़ दे |
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रइश - अमीर
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गुरुवार, 28 जनवरी 2016
सोमवार, 25 जनवरी 2016
गद्दार
लहू के रंग से हमनें जिन्हें हक़दार लिक्खा हैं |
हमारी कौम को उस कौम ने गद्दार लिक्खा हैं |
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ठगे हम ही गए जब-जब ढकी इंसाफ़ ने आँखें,
अदालत ने हमें आतंक ही हर बार लिक्खा हैं |
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रविवार, 24 जनवरी 2016
शनिवार, 23 जनवरी 2016
कवीता
खुदा बख्श दो अब न जुर्रत करूँगा |
"कवीता,, से अब ना मुहब्बत करूँगा |
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'अदा, के 'दिवानों, फलक, चाँद, तारों,
तुम्हारी खुदा से शिकायत करूँगा |
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तेरे लब, से अपने "लबों,, को लगा के
''जहर,, से तेरे "होठ,, शर्बत करूँगा |
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छुपा लें मुझे गर् तु 'काजल, बना कर
'बला, "बद्दुआ,, से हिफाजत करूँगा |
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अगर 'बेवफा, फिर से जो लौट आए
वफ़ा लफ्ज़ की फिर से इज्ज़त करूँगा |
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○ Rahish Pithampuri ○
शनिवार, 16 जनवरी 2016
शुक्रवार, 15 जनवरी 2016
गुरुवार, 14 जनवरी 2016
बद्दुआ

मेरा हर शेर देता बद्दुआ है हुस्न को उसके
वफा के नाम पर जिसने हमें हर बार लूटा है
शनिवार, 12 दिसंबर 2015
जाते ।
छुपाए भी नही जाते , निकाले भी नही जाते |
मेरी आँखो से ये आँसू, सँभाले भी नही जाते |
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मुहब्बत ने लगा के खोट जबसे, है मुझे छोड़ा
मेरी तकदीर के सिक्के, उछाले भी नही जाते |
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निकाला चाँद ने जबसे, मुझे महफ़िल से है यारो
सितारों के कभी दर पे, उजाले भी नहीं जाते |
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मुजावर क़ब्र का मेरी, रफीक बन बैठा जाने क्यूं
चढाने हर जगह फूल, ह़ुस्न वाले भी नहीं जाते |
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उठी है टीस दिल मे दर्द के, उठते सवालो से
कहा से जख्म लाते हो, सँभाले भी नही जाते |
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: : : : : : Rahish pithampuri : : : : : :
