बुधवार, 20 अप्रैल 2016

पैरवी

जिद कहूँ या जुस्तजू की पैरवी |
दिल करे अब आरजू की पैरवी |
☪
छोड दी है अब खुदा पर अस्मतें,
अब कठिन है आबरू की पैरवी |
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कत्ल का किस्सा बयां करती रही,
सुर्ख   होठों  पे  लहू  की  पेरवी |
☪
चांद तारों को सुबह ले जायगी ,
फिर करूं क्यूं फालतू की पैरवी |
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रात दिन है ज़ेहन से दिल लड़ रहा,
कर  रहा  है  गुफ्तगू  की  पैरवी |
☪
☪RAIS PITHAMPURI☪

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