तसव्वुर मे सही लेकिन अजब मंजर बनाता हूं
मैं काग़ज़ के सिपाही काटकर लश्कर बनाता हूं
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इमारत की सभी ईंटें लहू से सींचकर अपने
अमीर - ए - शहर तेरे वास्तें मैं घर बनाता हूं
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खयालों का मैं अपने मालिको मुख्तार हूं साहेब
सभी मसनदनशीं को ख्वाब मे नौकर बनाता हूं
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किसीको क़त्ल करने का है मेरा मुख़्तलिफ़ जज़्बा
मै पानी को जमा कर बर्फ के ख़ंजर बनाता हूँ
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तुम्हारी नफरते जायज नही मेरी गरीबी पर
तुम्हारी कार के अक्सर मैं ही पंचर बनाता हूं
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✒...... RAEES BASHAR...
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शनिवार, 11 फ़रवरी 2017
गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017
गुरुवार, 19 जनवरी 2017
लीजिये
चाँद को छत पे अपनी बुला लीजिये
आप पहलू में उनको बिठा लीजिये
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अच्छी लगती नही बद्लियां चाँद पे
अपने चैहरे से जुल्फें हटा लीजिये
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दर्द दहलीज़ पर छोड़कर हम चले
आखिरी खत हमारा उठा लीजिये
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रूह से रूह होती नही रू-ब-रू
जिस्म को दरमियां से हटा लीजिये
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इक वरक़ पर लिखा जो मैने लफ़्ज़-ए-इश्क़
उतरा काग़ज़ पे रंग-ए-हिना लीजिये
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✒......... *Rais pithampuri*
रविवार, 25 दिसंबर 2016
कब्र मे मैं हूं वो है पर्दे मे....
इश्क़ मेरा फना नही होता ।
तू अगर बेवफा नही होता ।
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कब्र मे मैं हूं वो है पर्दे मे,
आमना सामना नही होता ।
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बेरूखी बद् कलामी रूसवाई,
अब मुहब्बत मे क्या नही होता ।
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दिल अगर सोचकर लगाते हम
तो कोई हादसा नहीं होता ।
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दूर रह के करीब हो जैसे,
रूहों मे फासला नही होता ।
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.............Rais pithampuri
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गुरुवार, 22 दिसंबर 2016
मा

मुहब्बत माँ कि बन के दाएँ बाएँ साथ रहती है
मैं जब घर से निकलता हूं दुआएँ साथ रहती है
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सफर तन्हा नही होता बुजुर्गो के बुढ़ापे का,
जवानी से बुढ़ापे तक दवाएँ साथ रहती है
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बुरा जब वक्त आता है सभी दिल तौड जाते है,
मगर जैसे भी हो हालात माएँ साथ रहती है
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चली जाती है माएँ एक दिन हो जन्नती लेकिन
हमारे बीच उनकी दाश्ताएँ साथ रहती है
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गुरुवार, 8 दिसंबर 2016
फिदेल कास्त्रो

साम्यवाद, समाजवाद और अधिनायकवाद के इस लाल सितारे का अस्त एक ऐसे समय में हुआ है जब व्यक्तिवाद को सत्ता पर कब्ज़े के लिए बंदूक की बजाय मतपेटियों का सहारा मिल रहा है। व्यक्ति और विचार के बीच का अंतर निरंतर महीन हो रहा है। अमेरिका में एक नई तरह की लाल चादर चढ़ी है और इधर इसे लाल सितारे का अस्त हो जाना, प्रतीक रूप में ही सही, महत्वपूर्ण तो है ही। फिदेल कास्त्रो क्रांति से आगे क्या? के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे। क्या अच्छा हो सकता है, नायकवादी निरंकुश सत्ता अच्छा करना चाहे तो कैसे और बुरा तो कैसे, दोनों ही उनकी नीतियों, भाषणों और सिद्दांतों के जरिए परिभाषित होते रहेंगे। क्रांति के बारूद से अपने नायकत्व की सिगार जलाने वाले फिदेल कास्त्रो को लाल सलाम!!
शनिवार, 26 नवंबर 2016
गुरुवार, 10 नवंबर 2016
मत करना

किसी के इश्क़ मे दिल बेकरार मत करना ।
अगर हो चैन से जीना तो प्यार मत करना ।
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हमें यकीन है इक दिन वो लौट आएगा,
कहा था जिसने मेरा इंतज़ार मत करना ।
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मुहब्बतों मे कोई कब किसी की सुनता है,
किसी भी शख्स को तू होशियार मत करना ।
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बड़े सुकून से हम दोनो भाई रहते है,
हमारे बीच मे कोई दरार मत करना ।
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नज़र नज़र से मिले तो नज़र ही लग जाए,
किसी नज़र का तू ऐतबार मत करना ।
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