विजय:फिर जो घपाघप चालू हुआ...
तोताराम:उसकी गूँज अब तक कानों में गूँजती है।
मैं:यानी एक तलवार में दो म्यान?
विजय:फिर?
मैं:तुम्हारे मज़े हैं यार, यां तो किसी ने दीयनी
तोताराम:वो ऑनलाइन वाली थी तो?
मैं:अच्छा... वो तो सुन।
इक गर्ल मिली ऑन फेसबुक,
थी ब्लैक ब्यूटी, हार्ड लुक।
मुझे फोन पे मिलती किस्सियाँ,
और चैट में मिलता कामसुख।
विजय: (नॉटी अमेरिका)
इक रोज़ गया मैं मिलने साउथ,
छोड़ के पीछे शहर का क्राउड।
हाथ पकड़ के गेट पे लाई,
बड़े प्यार से बोली, "आउट!"
तोताराम: (निकल ल#डे!)
ख़्वाब हुए थे दफ़्न कमाल,
इश्क़ का हो गया बंटाधाल
फोन पे माँ से बोला, "लाल,
हुई रॉन्ग पावर्स मेरी इस्तेमाल।"
विजय: (मैं आ रहा हूँ माँ... मैं आ रहा हूँ!)
डोर को फिर से नॉक किया,
द्वार तुरंत ही खोल दिया
एक ही पंच में मैंने लाला
ब्यूटीफुल मुँह तोड़ दिया।
तोताराम: (ये ढाई किलो का हाथ है... काट्या, लोहा नहीं!)
2 कॉलेज वाली
विजय:और वो कॉलेज वाली... मिश्रिका!
तोताराम:अरे भाई, क्या कांटाप पीस थी यार वो!
विजय:नागिन की तरह चिपक के बैठती थी इसकी बाइक पे।
एक और पेज लो हिस्ट्री का,नाम था उसका मिश्रिका।चिपक-चिपक के रहती थी,मेरा टारगेट था विक्ट्री का।
एक रोज़ वो मुझसे मिलने बोली,मन का पंछी करे ठिठोली।हॉल में उसको वेट कराया,चाय में उसकी घोल दी गोली।
अरमान थे मेरे थाली में,और ध्यान था उसकी लाली में।मैं आँख में उसकी डूब गया,और चाय बदल दी साली ने।
(हाहा... फिर? फिर क्या हुआ?)
मैं हीरो और वो डायरेक्टर,मेरा चेंज किया उसने जेंडर।मैं C.I.D. का अभिजीत, वोMoney Heist की प्रोफेसर।
बोलेनमो अब ये चोरी नहीं रही
मुँहतोड़ जवाब दो
तुम सालो मज़ाक उड़ा रहे हो मेरा।
ज़िंदगी तेरा मज़ाक उड़ा रही है, लाले।
अरे वो सब छोड़, मकान मालकिन की क्या स्टोरी है?
यूं हालत बिगड़े माउस की,
वो खुशबू उसके ब्लाउज़ की
मैं उसके घर का किरायेदार,
वो लैंडलॉर्ड है हाउस की।
हालात गज़ब थे उस दिन से,
मैंने पेंट लगाया जिस दिन से
सब आग-बबूला हो जाते,
जब देखते मुझको दूरबीन से।
सब टॉप माल को ताड़ते थे,
मुझे देख के कपड़े फाड़ते थे
वो बीएफ के संग चीखती थी,
लोग चाँटे मुझको मारते थे।
एक रोज़ गया कोई खेल के होली,
मैडम मुझको बुला के बोली,
"आरके, इसको फेंक आओ..."
हाथ में दे दी दूध की थैली।
हाहाहा... जोक... मीम।
और वो तेरी एक्स... उसका क्या?
वो भी बताएंगे अगले पार्ट में
पार्ट 4 X girlfriend
और वो तेरी एक्स... उसका क्या?
अरे भैया, चलती-फिरती कोकीन है वो तो।
डोंट थिंक अबाउट माय एक्स-बे,
लोग एवरी डे करें एक्स-रे
शी गॉन विद अदर्स ओयो ऐसे,
जैसे दादा ठाकुर केम मैक्स पे
(मोबाइल में उसका फोटो दिखाते हुए)संस्कार उम्र से बड़े हैं इसके।
संस्कार को छोड़ा चाली मैं,
जब मिलने पहुँचा हलीमे
मुझे हैंडकफ़ से बाँध दिया,
और लोग बुला लिए साली ने।
दो ब्लैक डॉग थे, बॉडी हार्ड,
गर्लफ्रेंड ने कर दिया बड़ा फ्रॉड
इस हाल हुआ चीहरण,
कि सूज गया था बैकयार्ड।
लेटे-लेटे बेड पे बेचैनी बढ़ गई,
बैकडोर की भी चोट सहनी पड़ गई
फ्रेश होते वक्त सोचता था, बेवकूफ़,
लेने के लिए गया था, देनी पड़ गई।
आर2एच डायलॉग

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