शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

जरूरत क्या है

जरूरत क्या है

क्या हंसी यार कि सूरत है नज़ाकत क्या हैं ।
कोई  पूछें  मेरे दिल  से मेरी हालत क्या हैं ।
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यार  की  बाहों   में  मदहोश  हुए  बैठा   हूँ,
अब मुझे  होश में  आने कि जरूरत क्या है

सोमवार, 1 मई 2017

छू लिया

मैंने परवाज़ से सब का मन छू लिया
घोंसले  से  उड़ा तो  गगन  छू लिया
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तितलियां सहमी हैं फूल भी सहमे हैं
जाने किसने हमारा चमन छू लिया
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उसने पूछा था क्या साथ में जाएगा
एक मुर्दे का मैंने कफ़न छू लिया
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इसलिए दी अदालत ने मुझको सज़ा
नक़्शे पे क्यू पड़ौसी वतन छू लिया
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RAEES BASHAR #PITHAMPURI

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

कट गई

घड़ियां तवील खौफ़ की बारिश मे कट गई
फिर एक रात मौत की ख्वाहिश मे कट गई
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दुनियां से भाई - चारा निभाने के बावजूद
गर्दन हमारी आपसी रंजिश मे कट गई
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इक दिन मिला ना वक्त इबादत के वास्तें
मेरी पतंग ए उम्र नुमाइश मे कट गई
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.......... RAEES BASHAR
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शुक्रवार, 31 मार्च 2017

जरूरी तो नही

जरूरी तो नही

मेरे आगाज़ का अंजाम जरूरी तो नही
हो तेरे साथ मेरा नाम जरूरी तो नही
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था  मेरे दम से चराग़ाँ  कभी बाज़ार मगर
अब भी ऊंचा हो मेरा दाम जरूरी तो नही
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जिस के मैैं नाम से बदनाम हूं वो मेरी तरह
हो मेरे  नाम से  बदनाम  जरूरी  तो नही
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........... Raees BasHar
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गुरुवार, 9 मार्च 2017

फनकारी है

फनकारी है

ज़ख़्मी ज़ख़्मी है जिगर लब पे तरफ़दारी है 
ये मुहब्बत भी अजब तरह की बीमारी है 

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मेरी ग़ज़लों में सिवा इश्क़ के कुछ खास नही
खास तो आपके  पढ़ने की अदाकारी है ।
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वो  बहुत  देर  तलक  राह  नही  देखेंगे
जल्दी आ जाओ मेरे दफ़्न की तैयारी है ।
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रोज़ आ जाते है यादों की ये मय्यत लेकर
अब भी नींदों पे वो ख़्वाबों का सितम जारी है
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क्यूं किसी और के शेरों में कमी ढुंढें "रईस"
तेरे  शेरों  में भी उस्ताद की फनक़ारी है ।
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✒ .....Raees BasHar....

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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

चलते है

चलते है

नकाबपोश भी जलवे दिखा के चलते है
अजीब  शौक  है  पर्दा उठा के चलते है
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हरेक  शय  हुई है खाक दीद से उनकी
नसीब हम भी चलो आजमा के चलते है
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तमाम   जिंदगी   पैरों   में   रौंदते  वाले
ज़नाज़ा कद के बराबर उठा के चलते है
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गिरे हुए को उठाना है मुखतलिफ जज्बा
उठे  हुए  को  तो  सारे  गिरा के चलते है
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अजीब सा नया फैशन चलन मे आया है
शरीफ लोग भी काॅलर चडा के चलते है
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✒....  RAEES BASHAR

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

बनाता हूं

तसव्वुर मे सही लेकिन अजब मंजर बनाता हूं
मैं काग़ज़ के सिपाही काटकर लश्कर बनाता हूं
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इमारत की सभी ईंटें लहू से सींचकर अपने
अमीर - ए - शहर तेरे वास्तें मैं घर बनाता हूं
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खयालों का मैं अपने मालिको मुख्तार हूं साहेब
सभी मसनदनशीं को ख्वाब मे नौकर बनाता हूं
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किसीको क़त्ल करने का है मेरा मुख़्तलिफ़ जज़्बा
मै पानी को जमा कर बर्फ के ख़ंजर बनाता हूँ
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तुम्हारी नफरते जायज नही मेरी गरीबी पर
तुम्हारी कार के अक्सर मैं ही पंचर बनाता हूं
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✒...... RAEES BASHAR...
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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

मोहताज है

क्या ग़ज़ब कैसे कैसों के मोहताज हैं ।
बुतक़दे के खुदाओं के मोहताज हैं ।
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सब अमीरों कि करली हिमायत मगर
आज भी  पैसे  पैसों के मोहताज हैं ।
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ज़हर  दे  या  दवा  दे  तेरा शुक्रिया
जब तलक तेरे जैसों के मोहताज हैं ।
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गुरुवार, 19 जनवरी 2017

लीजिये

चाँद को छत पे अपनी बुला लीजिये
आप पहलू  में उनको बिठा लीजिये
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अच्छी लगती नही बद्लियां चाँद पे
अपने चैहरे  से  जुल्फें हटा लीजिये
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दर्द दहलीज़ पर  छोड़कर हम चले
आखिरी  खत हमारा उठा लीजिये
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रूह  से  रूह  होती  नही  रू-ब-रू
जिस्म को दरमियां से हटा लीजिये
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इक वरक़ पर लिखा जो मैने लफ़्ज़-ए-इश्क़
उतरा काग़ज़ पे रंग-ए-हिना लीजिये
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✒......... *Rais pithampuri*