शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

मत करना

हमें यकीन है इक दिन वो लौट आएगा
जो कह गया था मेरा इंतज़ार मत करना
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बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

देखते है

नजर को मिलाकर नजर देखते है |
मुहब्बत का अपनी असर देखते है |
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थी जिनकी निगाहों मे बेखौफ चाहत,
उन्हीं की निगाहों मे डर देखते है |
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हमे दिल से अपने भुला देने वाले,
तेरे ख्वाब हम रातभर देखते है |
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कई दर्द हमने किताबों में लिक्खे,
मगर लोग खाली कवर देखते है |
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मुनासिब नही बिन तेरे जिंदगी अब,
वो कब यूं कहें उम्र भर देखते है |
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है  काँटों  भरी  ज़िन्दगी  ये  हमारी,
मगर हम खियाबाँ में घर देखते हैं |
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सहम जाती है धड़कने मेरी उस पल,
उसे हम जहा भी जिधर देखते है |
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मेरे नैन अब भी "कविता" का रस्ता,
सुबह शाम और दोपहर देखते है |
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मेरी मौत पर कौन कितना है रोया,
उन्हें जब लगेगी खबर देखते है |
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"रईस" कोई उम्मीद उनसे न रक्खो,
मुहब्बत में जो रहगुजर देखते है |
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ख़ियाबां= पुष्पवाटिका, फूलों की क्यारी
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

लिखूँगा

तेरे हुक्म पर इल्तिजा पर लिखूँगा
मैं अब शेर तेरी अदा पर लिखूंगा

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

हुकूमत मिली गर मुझे इस जहाँ की
तिरा नाम मैं चन्द्रमा पर लिखूँगा

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

बहुत लिख लिया बेवफ़ाई पर मैंने
ग़ज़ल कोई तेरी वफ़ा पर लिखूँगा

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

निगाहें झुका कर तेरा मुस्कुराना
सनम तेरी शर्म ओ हया पर लिखूँगा

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

तेरा इश्क़ ही अब ख़ुदा है हमारा
मैं जब भी लिखूँगा ख़ुदा पर लिखूंगा

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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

नजरअंदाज

हमारे बीच में जो फासले है कम नही होंगे |
तुम्हारी याद मे अब नैन मेरे नम नही होंगे |

नजरअंदाज कर लो आज लेकिन याद रखना तुम
हमारी याद आएगी तुम्हे जब हम नही होंगे |

मेरे दिल मे बना नासूर वो तेरा कहा हर लफ्ज़ ,
रहूंगी खुश वहाॅ पर मैं जहाॅ पर तुम नही होंगे |
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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

बोलतीं है...

कभी हद से बढ़कर कहां बोलतीं है ।
मेरी  गज़ले  मेरी  जुबां  बोलतीं  है ।
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तुम्हीं  से शुरू मेरे  दिल की है दुनिया
तुम्हें   ही  जमीं  आसमां  बोलतीं  है ।
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कई नामचीन  चहरे  मरते है उस पे,
मगर वो  हमें अपनी  जां बोलतीं है ।
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जला  करते  है  फूल  उनसे है सारे,
मेरा  नाम  जब  भी जहां बोलतीं है ।
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हमें सिर्फ  वो  ही  नही जान  अपनी,
फलां और फलां और फलां बोलतीं है
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Rais Pithampuri. .....

सोमवार, 20 जून 2016

लिखूँगा

तेरे हुक्म पे इल्तिज़ा पे लिखूँगा |
मैं अब शेर तेरी अदा पे लिखूँगा |

अगर मिल गई जो हुकूमत जहां की
तेरा नाम मैं आसमाॅ पे लिखूँगा |

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रविवार, 15 मई 2016

वास्तें

छोड़कर हमको गया जो... अजनबी के वास्तें ।
अब दया दिल में नही उस... आदमी के वास्तें ।

बेवफ़ा कहकर पराया.. कर दिया हमने जिसे,
गिर रहे है अब भी आँसू... बस उसी के वास्तें ।

है अजब सा सिलसिला कुछ इश्क़ की बरसात का,
आसमाँ भी चीख... पड़ता है जमीं के वास्तें ।

इश्क़ के जख्मों से अच्छा... दोस्ती का मर्तबा
जान भी कुर्बान........ मेरी दोस्ती के वास्तें ।

आस और उम्मीद छोडों और सो जाओ रईस
कब तलक..... जागे रहोगे चांदनी के वास्तें ।

••••• Rais Pithampuri •••••

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