गुरुवार, 18 जून 2015

बारिश स्पेशल

........मेरी पड़ोसन के "नाम,,

बादलों कहर बरसाओ के आज खता सरेआम कर लूँ ।
उसकी बाहों में ऐसा उलझूं के सुबह से शाम कर लूँ ।

बारीश में भिगकर वो तपती दहलीज़ पर बैठी है,
हो इजाजत तो सामने अपना मुकाम कर लूँ ।

थक गया हूँ उसका भिगा बदन निहारते-निहारते,
वो एक इशारा कर दे के थोडा आराम कर लूँ ।

औकात है हुश्न सिर्फ़ बिखरे बिस्तरों की अमानत है,
बरसने का वादा करो तो छतरी का इंतजाम कर लूँ ।

उतार फेंको इन हिफाजत के बुढे पहरेदारों को,
ताकी नौजवां रियासत मै अपने नाम कर लूँ ।

Rahishpithampuri786@gmail.com

रिश्तो की हत्या

आज के हमारे युवाओं को न तो भविष्य की तनहाइयों की फिक्र है, न हीं जिंदगी की वीरानियों की परवाह, क्योकि वो आज में जीता है। इसी सोच के चलते वो रिश्तों की अहमियत को इस कदर नजरअंदाज कर रहा है। यही वजह है कि न अब रिश्ते टिकाऊ होते है, न ही होता है उनमें कमिटमेंट। किसी भी रिश्ते की बुनियाद होती है प्यार और विश्वास। यदि ये दोनों ही चीजें रिश्ते में न हो, तो वो रिश्ता महज समझौता बनकर रहा जाता है। आज हम जिस तेजी से रिश्ते बनाते है, उसे तेजी से उन्हे तोड भी देते है, क्योकि रिश्ते बनाते समय हमें खुद ही नहीं पता होता है कि आखिर ये रिश्ता कब तक टिकेगा। पिछले 10 सालों में तलाक के मामले कुछ शहरों में दोगुने हो गए तो कही-कही इनमें तीन गुना बढोत्तरी हुई है। जहां 90 के दशक में तलाक के औसतन 1000 मामलें हर साल सामने आते थे, वहीं अब ये संख्या बढकर 9000 हो गई है। अधिकतर मामलों में सामंजस्य की कमी या पार्टनर की बेवफाई को ही तलाक का आधार बनाया गया। बदलती लाइफस्टाइल, बढती प्रोफेशनल आकांक्षाएं, न्यूक्लियर फैमिली, रिश्तों में बढती अपेक्षाए ही इन बढती तलाक दरों की मुख्य वजहें हैं । आज महिलाएं भी तलाक की पहल करने में पीछे नहीं है। अगर रिश्ते में जरा-सी भी कमी या अनबन नजर आती है, तो बयाय कोई समाधान निकालने के तलाक को ही अपनी आजादी का आसान रास्ता मानकर लोग रिश्ते तोडने में हिचकते नहीं। अपनों का साथ, प्यार का एहसास जिंदगी को खुशनुमा बना देता है, जीवन में थोडी-बहुत तकरार भी जरूरी है, इसी का नाम तो जिंदगी है, वक्त रहते जिंदगी को संभाल लिया जाए तो बेहतर है, वरना ऎसा न हो कि हम जब गिरे, तो कोई थामनेवाला ही न हो, हम जब रोएं तो किसी का कंधा सिर रखने के लिए न हो।

आज के दौर में रिश्तो में कडवाहट डालने काम ये सोशल मीडिया बखूबी कर रही है...ये ऐसा इसलिए क्यूंकि लोग ऐसे मामले में सेंटी हो जाते है ऐसे मामलो में...
एक उदाहरण देके बताता हूँ.....
जैसे कोई एक शादी शुदा जोड़ा है जो काफी खुश है और जीवन अच्छे से चल रही है. जो पति है वो फेसबुक यूज़ करता है अब जाहिर सी बात है कई दोस्त भी बनेंगे और बाते भी होंगी उसमे महिलाएं भी हो सकती है...हो सकता है किसी महिला से कोई रिश्ता बन जाये जैसे की बहन का.
अब जब ये चीज़ पत्नी देखती है तो वो बुरा मानती है ऐसा अक्सर सभी पत्नियाँ करती है...अब वो लाख समझाए मगर पत्नी नहीं मानती है और इसी में बात तलाक तक आ जाती है...
अब या तो फेसबुक का इस्तेमाल ही छोड़ दे या फिर......
यही चीज़ उन पत्नियों के साथ भी होता है अगर वो फेसबुक का उपयोग करती है....
इसलिए जो भी हो हर चीज़ को गहराई से देखनी चाहिये...रिश्तो में शक जैसी चीज़ नहीं होनी चाहिए, रिश्तो की अहमियत को समझे और उसको निभाए भी....इस दौर की तो ये हालत हो गयी है कोई रिश्ता बनाना ही नहीं चाहता....चाहे वो दिल्लगी का हो या दोस्ती का....
हर रिश्ता विश्वास पर टिका होता है। आपको अपने साथी पर विश्वास करना चाहिए। अगर आपके रिश्ते में विश्वास नहीं होगा तो आप चाहकर भी एक दूसरे के करीब नहीं आ पांएगे। विश्वास के बिना कोई भी रिश्ता नही टिक सकता। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले एक मौका जरूर दे।
आप कितने ही प्रैक्टिकल हो, लेकिन जीवन में किसी मोड पर एक साथी, एक हमसफर की जरूरत जरूर महसूस होती है। जीवन का ये सूनापन फिलहाल ग्लैमरस लाइफस्टाइल और आर्थिक कामयाबी के बीच नजर न आ रहा हो, लेकिन कहीं ऎसा न हो कि जब ये अकेलापन नजर आने लगे, तब तक देर हो चुकी हो।


मंगलवार, 16 जून 2015

ढेरों पैसा कमाने से सफल इन्सान नहीं बन जाते

ढेरों पैसा कमाने से सफल इन्सान नहीं बन जाते
व्यक्ति की, सदैव अतृप्त रहने वाली भौतिक कामनाएं उसके सात्विक चित्त और अमूल्य चरित्र को पतन के गर्त में पहुंचा देती हैं। रुपये-पैसे के आधार पर खड़ा कृत्रिम जीवन जीने की अंधी लालसा से ही हमारी अंदर की शांति लुप्त हो रही है। कुछ प्राप्त हो गया तो प्रसन्न हो गए, कुछ छिन गया, नहीं मिला तो दुखी हो गए। ढेर सारा पैसा कमाने से हम सफल इन्सान नहीं बन जाते। पैसा कमाने के साथ उसका मकसद भी नेक होना चाहिए, क्योंकि एक अच्छा मकसद ही हमंे हकीकत में अमीर बनाता है। हम सच्चे अमीर तभी बनते हैं, जब लोग हमारा सम्मान करते हैं, हम पर भरोसा करते हैं। वास्तविक आनंद की अनुभूति केवल वे ही कर सकते हैं, जिन्होंने व्यर्थ के आकर्षण से अपने को मुक्त कर लिया हो। संत के इन वचनों से सेठ को शांति का रास्ता मिल गया।

संयम अपने आप नहीं आता, उसके लिए साधना करनी पड़ती है। लालसाएं अपने आप कम नहीं होतीं, उनके लिए प्रयास करना पड़ता है। जीवन की चिंता और पदार्थ के मोह से अपने आप मुक्ति नहीं होती, खुद को मुक्त करना पड़ता है।

दहेज का दर्द

नहीं चाहिए मोटर गाड़ी,
नहीं चाहिए बंगला-साड़ी
हम घाघरे में ही रह लेंगे
बापू, हम क्वांरी रह लेंगे।।

नहीं चाहिए बनें दुल्हनिया
नहीं चाहिए सास-ननदिया
हम-तुम संग सब सह लेंगे
बापू, हम क्वांरी रह लेंगे।।

गोटे वाली चुनर न चाहें
मांग में हम सिंदूर न चाहें
हम बिन कंगन भी जंच लेंगे
बापू, हम क्वांरी रह लेंगे।।

हम दोनों सखियों-सी रहेंगे
आपस में न लड़े-झगडेंगे
तेरी सयानी बिटिया बनेंगे
बापू हम क्वांरी रह लेंगे।।

मोहम्मद सरवर अली खान

सोमवार, 15 जून 2015

इतने नादान हो फिर भी दिल लगाते हो

इतने नादान हो फिर भी दिल लगाते हो
इतने नाजुक हो, क्यूं पत्थर से टकराते हो

रु-ब-रु आती है वो तो छुप जाते हो
इतने प्यासे हो कि पानी से घबराते हो

आरजू पा ही गए तुम हुस्ने जानां की
तुम भी रातों में तन्हा सा गजल गाते हो

शोला भड़का है दिल के सनमखाने में
चिरागों की तरह खामोश नजर आते हो

रविवार, 14 जून 2015

क्या है ☆★

क्या है ☆★

लौंडे चिकने-चपट दिख रहे
.... इतनी सालों को मस्ती क्या है ।
बन जाते हैं खस्सी बकरें
.... एकाध मेमनी इनसे फंसती क्या है ।

हमें भी एक खुबसूरत, हंसीं, जवां
.... फुलझड़ियां भा गई है,
हमें इससे क्या मतलब
.... उसकी फिरकापरस्ती क्या है ।

कल रात जब कलाई थामी उसकी
.... तो खामखां चीख पडी़ ।
कमबख्त चुडियां न जाने
.... उसकी लगतीं क्या है ।

जवाब ए इजहार के बजाय
.... मुसकुरा कर जाने लगी
हमने तपाक से बाहों में भर कर कहा
.... जवाब दे साली हंसती क्या है ।

उसके सुर्ख होठ मुझपर
.... बादल बनकर गरजे
कमीने छोड़ मुझे दो टके के
.... शायर तेरी हस्ती क्या है ।

मैं शागिर्द ए कामदेव हूँ
.... नाम और असलीयत से रईश
नोटों के बंडल से तेरा मुंह लदा दुंगा
.... पैसा ही लेगी ना बरसती क्या है ।

गुरुवार, 11 जून 2015

सवाल ☆★

फिरकापरस्त मुस्लिम नाव के किनारे क्या होंगे ।
फिरका ही बस सहारा है तो बे सहारे क्या होंगे ।

मौत के आगोश में मेरे यार मुझे कहकर छोड गए,
तुम अपनी जात के नही होते तो हमारे क्या होंगे ।

कहीं सिया कहीं सुन्नी तो कहीं जिहादी है,
या खुदा फिरकों की मस्जिदों के मिनारे क्या होंगे ।

एक कयामत आ गई है भाई से भाई लड रहा,
तो उस आग उगलने वाले दज्जाल के नजारे क्या होंगे ।

Rahishpithampuri786@gmail.com

बुधवार, 10 जून 2015

लश्कर डूबो देगा ।

मुझको उसकी जुदाई का मंजर डूबो देगा ।
मेरी दुल्हन दोस्ती का रहबर डूबो देगा ।

कल जिसे बैठकर तेरा किस्सा सुनाया था,
मेरी जिंदगी में जहर वहीं अजगर डूबो देगा ।

सज-संवर ले चाहें जितना लाल-पिले रंगो से,
तेरी हल्दी मेहंदी को नालियों में मेहतर डूबो देगा ।

यकीन था मुझको तेरी मोहब्बत में दम नहीं,
मेरी आशिकी का शौक सारा लश्कर डूबो देगा ।

आज मेरे ही रिश्तेदार मेरे अब्बा से कह गए,
लौंडा इश्क में पड गया है तेरा घर डूबो देगा ।

मेरे आंसुओं के प्यासों मनादी जश्न में कर दो,
इसके आंसूओ में सच्चाई है बहकर डूबो देगा ।

सदमे में मुझको देख मेरा यार कहता है,
तु गमों का बादल मत बन पुरा शहर डूबो देगा ।

Rahishpithampuri786@gmail.com