कोमल उंगलियों ने मेरी डोरबेल छूई
मैं अकेला ही था बोतल से लिपटा हुआ
तभी दरवाजे पे मैडम की दस्तक हुई
मैंने डोर खोला आंखों पे यकीन ना हुआ
मेरे दर पे आई खुद ही कैसे चलके बेवफा
जो भी जख्म मिले है उन्हें नययो भूल
सकदा एंड वक्त पे
....................दिया था दगा
चली जा बेवफा, तेरा कोई ना यहां
मैं इश्क़े मरीज हूं, दे दूंगा बद्दुआ
तेरे लिए ही तो शादी से मैं भाग आई हूँ,
मेरा प्यार और तेरी माफ़ी साथ लाई हूँ।
जो भी भूल हुई है, उसे भूल जा सनम,
ऐसे मुझको न दे कोई सज़ा।
तू मान मेरी जान,
मैं नहीं बेवफ़ा,
कि मेरे बदलने की मम्मी थी वजह।
तू मान मेरी जाँ...

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